Sunday, 25 February 2018

बचपन 2

शाम ढल गई;
पंछी घौसलों में गुम हो गए;

बचपन की मस्तियों में खोए थे हम;
नींद खुल गई;
और हम बड़े हो गए;

बड़ों की गोद सर रख;
कहानी सुने कई साल गुजर गए;

वक्त गुजरा;
और नाज़ुक से दिल ये अब सख्त हो गए;

हाथ पकड़ जिनके सीखे थे हम चलना;
आज उनके ही सहारे बन गए;

बड़े होने की जल्दबाजी में थे तब;
और आज उसे याद कर;
फिर बचपन को तरस गए|

Sketch-Er

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