Wednesday, 13 December 2017

फितरत

मौजूदगी उसकी जैसे कोई ख्वाब सी है,
नजदीकियों से किसी की अब नफरत सी है,
तन्हाई में होती बारिश सुकून की है,
खो जाना उसमे जैसे मेरी फितरत सी है,
हँसी के नक़ाब की जरूरत सी है,
क्योंकि गमो से आजकल दोस्ती बढ़ाई सी है,
जिंदगी सारी इम्तेहान सी है,
आखिर पल पल में यादें जो किसी की समाई सी है।

Sketch-Er

Tuesday, 12 December 2017

कोशिश

कुछ कहने की चाहत है,
पर अल्फ़ाज़ों की खामोशी जारी है,
झुठलाने की कोशिश पूरी है,
पर नज़रो की बगावत जारी है,
रौनक चेहरे की अधूरी है,
मुस्कुराहट तले उसे छिपाना जारी है,
जिक्र होता बार बार है,
पर हर बार इसे महज इत्तेफाक बताना जारी है।

Sketch-Er

अंधियारी रात

एक अंधियारी रात थी, और घनघोर तन्हाई मेरे साथ थी, जला कर रखी हमने जो थोड़ी आग थी, परछाइयों में वो एक अलग ही कलाकार थी, व्याकुल सी नदी बह...