Monday, 30 October 2017

जिक्र

टूट कर,
खुद को समेट कर,
वक्त से भर घाव,
बेरुखी भरी बातों से,
धुँधली पड़ी यादों से,
हर दर्द को नकार,
ख्वाबों के गहरे दरिया से,
वादों की ठोकरों से,
तीखी बातों के थपेड़े से,
डगमगा कर,
खुद को संभाल कर,
नाउम्मीद से हारकर,
होकर सख्त,
हौसले को मजबूत कर,
झोंकों के खिलाफ,
कदमो को जमा कर,
कंही दूर जिक्र सुन तेरा,
एक बार फिर बिखर गया,
ताश के पत्तों से ढह गया,
ढेर जख्मों के बाद भी,
एक आवाज सुन फिर मुस्कुरा गया!

Sketch-Er

Thursday, 5 October 2017

जरूरी है!

मिटा दे सारे भेद;
उस चाँद की चाँदनी मे दो पल टहलना भी जरूरी है,

चेहरे की खूबसूरती नकार कभी मन से मुलाकात भी जरूरी है,

खुद को कोसे वो पल भी अपनी बदकिस्मती पर जिस पल तुम उदास रहो;
चेहरे पर वो मुस्कुराहट भी जरूरी है,

पिघल जाए ये पत्थर दिल जिसकी आँच से;
अल्फाज़ों में उस शख्स का जिक्र भी जरूरी है,

बेसक चेहरा शांत रहे;
पर ख्यालों के दरिया मे उफान आना जरूरी है!

Sketch-Er

अंधियारी रात

एक अंधियारी रात थी, और घनघोर तन्हाई मेरे साथ थी, जला कर रखी हमने जो थोड़ी आग थी, परछाइयों में वो एक अलग ही कलाकार थी, व्याकुल सी नदी बह...