Monday, 18 June 2018

जिंदगी

जिंदगी बड़ी सस्ती हो चुकी है;
तूफ़ानी समंदर में कागज की कश्ती हो चुकी है;
शैतानी हाथों नीलाम हो चुकी है;
इक पिंजरा तन का है;
वरना छोड़ इसे जिंदगी कबकी फरार हो चुकी है !

Sketch-Er

अंधियारी रात

एक अंधियारी रात थी, और घनघोर तन्हाई मेरे साथ थी, जला कर रखी हमने जो थोड़ी आग थी, परछाइयों में वो एक अलग ही कलाकार थी, व्याकुल सी नदी बह...