Sunday, 25 March 2018

हालात

ख़यालात आज भी लिखे जाते हैं,
फिर अल्फ़ाज़ों के धागों में बुने जाते हैं,
दर्द दिलों के बयां किये जाते हैं,
फिर आँशुओ के सहारे धुले जाते हैं,
मुस्कुराहट की आड़ में छिपाये जाते हैं,
पर आँखों के हालात सच कह जाते है,
इश्क़ के पौधे जो बारिश में बेखबर बड़े हो जाते है,
अक्सर गर्मियों में सूख जाते हैं।

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Monday, 19 March 2018

वक़्त

वक़्त जो थमे कोई हर्ज़ नही,
सबके हिस्से में खुशी हो ये जरूरी भी नही,
जिक्र हुआ सिर्फ सुख का दुःख का कोई अर्ज़ नही,
थमा जो दुःख तो फिर कोई मर्ज़ नही,
गुजार सके इसे भी; वक़्त के सिवा किसी का फर्ज़ नही,
कोसा तो बेहिसाब इसे; पर कारनामें इसके कंही दर्ज़ नही|

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Friday, 9 March 2018

गुलाब

चले थे उस एक फूल की तलाश में,

सराबोर था भींगकर जो रंग गुलाल में,

थे हम उस रास्ते में हसीन से;
जख्म मिले कई;
संभलकर जिसमें चलने की फिराक़ में,

मोह के घोर अंधेपन में;
हुई भूल बरतने को एहतियात में,

खूबसूरत तो था बहुत;
पर छिपा रखे थे कांटे कई; कम्बक्त खूबसूरती के नक़ाब में।


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अंधियारी रात

एक अंधियारी रात थी, और घनघोर तन्हाई मेरे साथ थी, जला कर रखी हमने जो थोड़ी आग थी, परछाइयों में वो एक अलग ही कलाकार थी, व्याकुल सी नदी बह...