Thursday, 27 December 2018

यादें

कभी पल भर को तो कभी वक़्त की कमी सी मालूम होती है,
पर मुस्कुराहट के मोड़ पर मुलाक़ात तुझसे हर रोज होती है,
कभी शब्दों की कमी है तो कभी तू बे - अल्फ़ाज़ ही होती है,
दूर बेशक सही पर ख़्वाब में तू हर पल साथ ही होती है,
धीमें  से पुकार कर तू छिपी कंही आस पास ही होती है,
यूं तो सब ठीक है पर कभी कभी तेरी कमी महसूस होती है।

Wednesday, 12 December 2018

बहाना

दो पल का ठेहरना था;
फिर छोड़ कर जाना था;
कभी नजरें मिलाना तो कभी शर्माना था;
हर बार  बड़ी उम्मीद से आना जैसे कुछ कहना था;
और फिर यहाँ वहाँ की बातें कर पहेलियाँ बुझाना था;
जिस तरह आने का, ठीक उसी तरह जाने का भी बहाना था !

Sketch-Er

अंधियारी रात

एक अंधियारी रात थी, और घनघोर तन्हाई मेरे साथ थी, जला कर रखी हमने जो थोड़ी आग थी, परछाइयों में वो एक अलग ही कलाकार थी, व्याकुल सी नदी बह...