Wednesday, 13 December 2017

फितरत

मौजूदगी उसकी जैसे कोई ख्वाब सी है,
नजदीकियों से किसी की अब नफरत सी है,
तन्हाई में होती बारिश सुकून की है,
खो जाना उसमे जैसे मेरी फितरत सी है,
हँसी के नक़ाब की जरूरत सी है,
क्योंकि गमो से आजकल दोस्ती बढ़ाई सी है,
जिंदगी सारी इम्तेहान सी है,
आखिर पल पल में यादें जो किसी की समाई सी है।

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Tuesday, 12 December 2017

कोशिश

कुछ कहने की चाहत है,
पर अल्फ़ाज़ों की खामोशी जारी है,
झुठलाने की कोशिश पूरी है,
पर नज़रो की बगावत जारी है,
रौनक चेहरे की अधूरी है,
मुस्कुराहट तले उसे छिपाना जारी है,
जिक्र होता बार बार है,
पर हर बार इसे महज इत्तेफाक बताना जारी है।

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Thursday, 9 November 2017

न रही

दूर उससे तन्हा मैं कुछ यूँ जिया की उसकी मौजूदगी की अब जरूरत न रही,
याद उसे बेशक किया मगर अब कोई मजबूरी न रही,
हर लम्हा दिल मे महफूज़ रखा मगर अब उसके आने की उम्मीद न रही
वो गलियां यहां आज भी है पर चाहत उनमें फिरने की अब न रही,
चेहरे पर मुस्कुराहट आज भी है पर मुस्कुराने की वजह अब वो न रही!

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Monday, 30 October 2017

जिक्र

टूट कर,
खुद को समेट कर,
वक्त से भर घाव,
बेरुखी भरी बातों से,
धुँधली पड़ी यादों से,
हर दर्द को नकार,
ख्वाबों के गहरे दरिया से,
वादों की ठोकरों से,
तीखी बातों के थपेड़े से,
डगमगा कर,
खुद को संभाल कर,
नाउम्मीद से हारकर,
होकर सख्त,
हौसले को मजबूत कर,
झोंकों के खिलाफ,
कदमो को जमा कर,
कंही दूर जिक्र सुन तेरा,
एक बार फिर बिखर गया,
ताश के पत्तों से ढह गया,
ढेर जख्मों के बाद भी,
एक आवाज सुन फिर मुस्कुरा गया!

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Thursday, 5 October 2017

जरूरी है!

मिटा दे सारे भेद;
उस चाँद की चाँदनी मे दो पल टहलना भी जरूरी है,

चेहरे की खूबसूरती नकार कभी मन से मुलाकात भी जरूरी है,

खुद को कोसे वो पल भी अपनी बदकिस्मती पर जिस पल तुम उदास रहो;
चेहरे पर वो मुस्कुराहट भी जरूरी है,

पिघल जाए ये पत्थर दिल जिसकी आँच से;
अल्फाज़ों में उस शख्स का जिक्र भी जरूरी है,

बेसक चेहरा शांत रहे;
पर ख्यालों के दरिया मे उफान आना जरूरी है!

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Monday, 25 September 2017

wajah

Galat hu jaroori nhi,
Wajah khamoshi ki aur bhi hai,

Muskurana sirf aadat nahi,
Kabhi kabhi ek majboori bhi hai,

Tanhaa rehna kismat nahi,
aksar ek chahat bhi hai,

harkate ajeeb yuhi nahi karta,
ajeeb meri fitrat bhi hai,

milna tumhara mehaj ittefaaq nhi,
shayad duaa ka asar bhi hai,

Kalakaari sirf shauk nahi,
Ye jindgi ki jaroorat bhi hai!

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Tuesday, 5 September 2017

जीवन

झूम रहे फूल प्यारे,
माँ समान जिन्हे तितलियाँ संवारे,
भाग रही लहर किनारे,
दूर कही उसे मोर पुकारे,
गवाह बन खड़े पेड़ सारे,
जाने क्या फुसफुसाते पत्ते सारे,
कर रहे कई इसारे,
आसमान के ये चांद तारे,
जंगल घने; दफ्न करे बीज कई सारे,
जाने कब से नींद में थे,
झाड़ियों के चिलमन से जिन्हे सूरज निहारे,
ओश की बूँदों ने नन्ही कोपलों के रूप निखारे,
आने की खुशी में जिनके कोयल कूँक मारे!

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Monday, 4 September 2017

शिक्षक

कभी कान पकड़,
तो कभी प्यार से,
कभी आँखे दिखाकर,
तो कभी कोई कहानी सुनाकर
कभी डांटकर,
तो कभी कोई पाठ पढ़ाकर,
कभी बैठक,
तो कभी मुर्गा बनाकर,
खुदा ने भेजे फरिस्ते कई,
जिन्दगी के हर मोड़ पर उन्हे शिक्षक बनाकर!

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Friday, 1 September 2017

Tanha

खामोशी का यूँ कहर है,
जैसे कोई धीमा ज़हर है,

तनहाई का ये पहर है,
जागा मै; सोया सारा शहर है,

मन यादों का सागर है,
उठती ख्यालों की एक लहर है,

फैला चारो ओर एकांत है,
ना जाने क्यो? अल्फाज आज शांत है|

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Friday, 25 August 2017

Khayaalo ko sath lekar,
Yaadon ke hathon me hath lekar,
Chaand taro ke beech khoya tha mai,
Jamaane se najrein churakar,
Kismat ko ittefaaq batakar,
Beparwah soya tha mai,
Tanhaai me kuchh gungunakar;
Shant khade pedo ko gale lagakar;
Jee bhar roya tha mai;
Khud ko himmat bandhakar;
Jeevan ke sabhi panne sametkar;
Ek dhage me piroya tha mai!

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अंधियारी रात

एक अंधियारी रात थी, और घनघोर तन्हाई मेरे साथ थी, जला कर रखी हमने जो थोड़ी आग थी, परछाइयों में वो एक अलग ही कलाकार थी, व्याकुल सी नदी बह...