Tuesday, 12 December 2017

कोशिश

कुछ कहने की चाहत है,
पर अल्फ़ाज़ों की खामोशी जारी है,
झुठलाने की कोशिश पूरी है,
पर नज़रो की बगावत जारी है,
रौनक चेहरे की अधूरी है,
मुस्कुराहट तले उसे छिपाना जारी है,
जिक्र होता बार बार है,
पर हर बार इसे महज इत्तेफाक बताना जारी है।

Sketch-Er

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