Tuesday, 29 May 2018

Ishaq!

न रुखसत किया और न ही हुआ हासिल;
न डूब पाया और न ही मिला साहिल;
न कोई क़त्ल हुआ पर फिर भी बदनाम हुआ क़ातिल;
न जाने कब और कैसे बाग़ी दिल हुआ इश्क़ काबिल|

Sketch-Er

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