धीमा था पहले थोड़ा सा,
अब तो जैसे थम सा गया,
नगद का उसूल था अब तक,
पर न जाने कब,
दो पल साथ गुजारे लम्हों का व्यस्त जिंदगी से उधार हो गया,
तन्हाई का शौक था कल तक,
पर अब नज़दीकियों का खौफ हो गया,
खामोश तो था अब तक,
पर अब बिना कुछ कहे ही काफी कुछ इजहार हो गया।
Sketch-Er
No comments:
Post a Comment