Tuesday, 5 September 2017

जीवन

झूम रहे फूल प्यारे,
माँ समान जिन्हे तितलियाँ संवारे,
भाग रही लहर किनारे,
दूर कही उसे मोर पुकारे,
गवाह बन खड़े पेड़ सारे,
जाने क्या फुसफुसाते पत्ते सारे,
कर रहे कई इसारे,
आसमान के ये चांद तारे,
जंगल घने; दफ्न करे बीज कई सारे,
जाने कब से नींद में थे,
झाड़ियों के चिलमन से जिन्हे सूरज निहारे,
ओश की बूँदों ने नन्ही कोपलों के रूप निखारे,
आने की खुशी में जिनके कोयल कूँक मारे!

Sketch-Er

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