खामोशी का यूँ कहर है,
जैसे कोई धीमा ज़हर है,
तनहाई का ये पहर है,
जागा मै; सोया सारा शहर है,
मन यादों का सागर है,
उठती ख्यालों की एक लहर है,
फैला चारो ओर एकांत है,
ना जाने क्यो? अल्फाज आज शांत है|
Sketch-Er
जैसे कोई धीमा ज़हर है,
तनहाई का ये पहर है,
जागा मै; सोया सारा शहर है,
मन यादों का सागर है,
उठती ख्यालों की एक लहर है,
फैला चारो ओर एकांत है,
ना जाने क्यो? अल्फाज आज शांत है|
Sketch-Er
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