Monday, 30 October 2017

जिक्र

टूट कर,
खुद को समेट कर,
वक्त से भर घाव,
बेरुखी भरी बातों से,
धुँधली पड़ी यादों से,
हर दर्द को नकार,
ख्वाबों के गहरे दरिया से,
वादों की ठोकरों से,
तीखी बातों के थपेड़े से,
डगमगा कर,
खुद को संभाल कर,
नाउम्मीद से हारकर,
होकर सख्त,
हौसले को मजबूत कर,
झोंकों के खिलाफ,
कदमो को जमा कर,
कंही दूर जिक्र सुन तेरा,
एक बार फिर बिखर गया,
ताश के पत्तों से ढह गया,
ढेर जख्मों के बाद भी,
एक आवाज सुन फिर मुस्कुरा गया!

Sketch-Er

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