मिटा दे सारे भेद;
उस चाँद की चाँदनी मे दो पल टहलना भी जरूरी है,
चेहरे की खूबसूरती नकार कभी मन से मुलाकात भी जरूरी है,
खुद को कोसे वो पल भी अपनी बदकिस्मती पर जिस पल तुम उदास रहो;
चेहरे पर वो मुस्कुराहट भी जरूरी है,
पिघल जाए ये पत्थर दिल जिसकी आँच से;
अल्फाज़ों में उस शख्स का जिक्र भी जरूरी है,
बेसक चेहरा शांत रहे;
पर ख्यालों के दरिया मे उफान आना जरूरी है!
Sketch-Er
उस चाँद की चाँदनी मे दो पल टहलना भी जरूरी है,
खुद को कोसे वो पल भी अपनी बदकिस्मती पर जिस पल तुम उदास रहो;
चेहरे पर वो मुस्कुराहट भी जरूरी है,
पिघल जाए ये पत्थर दिल जिसकी आँच से;
अल्फाज़ों में उस शख्स का जिक्र भी जरूरी है,
बेसक चेहरा शांत रहे;
पर ख्यालों के दरिया मे उफान आना जरूरी है!
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