दूर उससे तन्हा मैं कुछ यूँ जिया की उसकी मौजूदगी की अब जरूरत न रही,
याद उसे बेशक किया मगर अब कोई मजबूरी न रही,
हर लम्हा दिल मे महफूज़ रखा मगर अब उसके आने की उम्मीद न रही
वो गलियां यहां आज भी है पर चाहत उनमें फिरने की अब न रही,
चेहरे पर मुस्कुराहट आज भी है पर मुस्कुराने की वजह अब वो न रही!
याद उसे बेशक किया मगर अब कोई मजबूरी न रही,
हर लम्हा दिल मे महफूज़ रखा मगर अब उसके आने की उम्मीद न रही
वो गलियां यहां आज भी है पर चाहत उनमें फिरने की अब न रही,
चेहरे पर मुस्कुराहट आज भी है पर मुस्कुराने की वजह अब वो न रही!
Sketch-Er
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