ख़यालात आज भी लिखे जाते हैं,
फिर अल्फ़ाज़ों के धागों में बुने जाते हैं,
दर्द दिलों के बयां किये जाते हैं,
फिर आँशुओ के सहारे धुले जाते हैं,
मुस्कुराहट की आड़ में छिपाये जाते हैं,
पर आँखों के हालात सच कह जाते है,
इश्क़ के पौधे जो बारिश में बेखबर बड़े हो जाते है,
अक्सर गर्मियों में सूख जाते हैं।
Sketch-Er
फिर अल्फ़ाज़ों के धागों में बुने जाते हैं,
दर्द दिलों के बयां किये जाते हैं,
फिर आँशुओ के सहारे धुले जाते हैं,
मुस्कुराहट की आड़ में छिपाये जाते हैं,
पर आँखों के हालात सच कह जाते है,
इश्क़ के पौधे जो बारिश में बेखबर बड़े हो जाते है,
अक्सर गर्मियों में सूख जाते हैं।
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