Friday, 9 March 2018

गुलाब

चले थे उस एक फूल की तलाश में,

सराबोर था भींगकर जो रंग गुलाल में,

थे हम उस रास्ते में हसीन से;
जख्म मिले कई;
संभलकर जिसमें चलने की फिराक़ में,

मोह के घोर अंधेपन में;
हुई भूल बरतने को एहतियात में,

खूबसूरत तो था बहुत;
पर छिपा रखे थे कांटे कई; कम्बक्त खूबसूरती के नक़ाब में।


Sketch-Er

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