Thursday, 10 January 2019

आज भी

खामोशियों में तेरे अल्फाजों की दस्तक जारी आज भी है,
कोशिशें भूल जाने की थी पूरी,
पर ख़यालो के दरमियान बगावत की बीमारी आज भी है,
निकला तो तन्हा ही था मैं,
पर बीते लम्हों की हर मोड़ में मिलने की तैयारी आज भी है,
मुस्कुरा कर गम भुलाया तो था ही सही,
पर मिल कर तुझसे खुदको भूल जाने की चाहत मुझे आज भी है।

Sketch-Er

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