Friday, 8 February 2019

दूरी

वो आज फिर कुछ इस तरह से मुस्कुरा रही है,
जैसे कंही दूर जा रही है,
यंहा वंहा की बातें कर,
बस नजरें चुरा रही है
चेहरे के नक़ाब तले,
न जाने क्या क्या खयालात छुपा रही है
कहना कुछ था,
और कहे कुछ और ही जा रही है,
धीमें ही सही,
पर अब दूर जाने की घड़ी नजदीक आ रही है,
वो आज फिर कुछ इस तरह से मुस्कुरा रही है,
जैसे कंही दूर जा रही है!

Sketch-Er

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