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अंधियारी रात
एक अंधियारी रात थी, और घनघोर तन्हाई मेरे साथ थी, जला कर रखी हमने जो थोड़ी आग थी, परछाइयों में वो एक अलग ही कलाकार थी, व्याकुल सी नदी बह...
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वक़्त जो थमे कोई हर्ज़ नही, सबके हिस्से में खुशी हो ये जरूरी भी नही, जिक्र हुआ सिर्फ सुख का दुःख का कोई अर्ज़ नही, थमा जो दुःख तो फिर कोई म...
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शाम ढल गई; पंछी घौसलों में गुम हो गए; बचपन की मस्तियों में खोए थे हम; नींद खुल गई; और हम बड़े हो गए; बड़ों की गोद सर रख; कहानी सुने...
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जिंदगी बड़ी सस्ती हो चुकी है; तूफ़ानी समंदर में कागज की कश्ती हो चुकी है; शैतानी हाथों नीलाम हो चुकी है; इक पिंजरा तन का है; वरना छोड़ इसे...

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